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Friday, 18 August 2017

अगर पंचक के दौरान किए ये काम तो हो जाएंगे बरबाद

जब चंद्रमा गोचर में कुंभ और मीन राशि से होकर गुजरता है तो यह समय अशुभ माना जाता है इस दौरान चंद्रमा धनिष्ठा से लेकर शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद एवं रेवती से होते हुए गुजरता है इसमें नक्षत्रों की संख्या पांच होती है इस कारण इन्हें पंचक कहा जाता है। कुछ कार्य ऐसे हैं जिन्हे विशेष रुप से पंचक के दौरान करने की मनाही होती है। पंचक में आने वाले नक्षत्रों में शुभ कार्य हो सकते हैं। पंचक में आने वाला उत्तराभाद्रपद नक्षत्र वार के साथ मिलकर सर्वार्थसिद्धि योग बनाता है, वहीं धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद व रेवती नक्षत्र यात्रा, व्यापार, मुंडन आदि शुभ कार्यों में श्रेष्ठ माने गए हैं। पंचक को भले ही अशुभ माना जाता है, लेकिन इस दौरान सगाई, विवाह आदि शुभ कार्य भी किए जाते हैं। पंचक में आने वाले तीन नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद व रेवती रविवार को होने से आनंद आदि 28 योगों में से 3 शुभ योग बनाते हैं, ये शुभ योग इस प्रकार हैं- चर, स्थिर व प्रवर्ध।
इन शुभ योगों से सफलता व धन लाभ का विचार किया जाता है।
रोग पंचक: रविवार को शुरू होने वाला पंचक रोग पंचक कहलाता है। इसके प्रभाव से ये पांच दिन शारीरिक और मानसिक परेशानियों वाले होते हैं। इस पंचक में किसी भी तरह के शुभ काम नहीं करने चाहिए। हर तरह के मांगलिक कार्यों में ये पंचक अशुभ माना गया है।
राज पंचक: सोमवार को शुरू होने वाला पंचक राज पंचक कहलाता है। ये पंचक शुभ माना जाता है। इसके प्रभाव से इन पांच दिनों में सरकारी कामों में सफलता मिलती है। राज पंचक में संपत्ति से जुड़े काम करना भी शुभ रहता है।
अग्नि पंचक: मंगलवार को शुरू होने वाला पंचक अग्नि पंचक कहलाता है। इन पांच दिनों में कोर्ट कचहरी और विवाद आदि के फैसले, अपना हक प्राप्त करने वाले काम किए जा सकते हैं। इस पंचक में अग्नि का भय होता है। इस पंचक में किसी भी तरह का निर्माण कार्य, औजार और मशीनरी कामों की शुरुआत करना अशुभ माना गया है। इनसे नुकसान हो सकता है।
मृत्यु पंचक: शनिवार को शुरू होने वाला पंचक मृत्यु पंचक कहलाता है। नाम से ही पता चलता है कि अशुभ दिन से शुरू होने वाला ये पंचक मृत्यु के बराबर परेशानी देने वाला होता है। इन पांच दिनों में किसी भी तरह के जोखिम भरे काम नहीं करना चाहिए। इसके प्रभाव से विवाद, चोट, दुर्घटना आदि होने का खतरा रहता है।
चोर पंचक : शुक्रवार को शुरू होने वाला पंचक चोर पंचक कहलाता है। इस पंचक में यात्रा करने की मनाही है। इस पंचक में लेन-देन, व्यापार और किसी भी तरह के सौदे भी नहीं करने चाहिए। मना किए गए कार्य करने से धन हानि हो सकती है।
इसके अलावा बुधवार और गुरुवार को शुरू होने वाले पंचक में ऊपर दी गई बातों का पालन करना जरूरी नहीं माना गया है। इन दो दिनों में शुरू होने वाले दिनों में पंचक के पांच कामों के अलावा किसी भी तरह के शुभ काम किए जा सकते हैं|
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Thursday, 3 August 2017

प्रेमी से है अनबन तो करें ये उपाय, तुरंत बनेगी बात


कई बार ना चाहते हुए भी जीवनसाथी या प्रेशर के बीच अनबन हो जाती है। ऐसे में इन उपायों को अपनाने से तुरंत राहत मिलने लग जाती है।
अपने प्यार को मनाने के लिए कामदेव के एक खास मंत्र का बेहद सार्थक माना गया है। वो मंत्र है: “ॐ नमः काम-देवाय। सहकल सहद्रश सहमसह लिए वन्हे धुनन जनममदर्शनं उत्कण्ठितं कुरु कुरु, दक्ष दक्षु-धर कुसुम-वाणेन हन हन स्वाहा”। साधक अगर बताए मंत्र का एक महीने सुबह, दोपहर और रात मे एक-एक माला जप करें मंत्र सिद्ध हो जाता है। एक बार ये सिद्धि हो जाये तो साधक मन में मंत्र का जप करके जिसकी तरफ देखेगा वो इंसान कभी भी साथी भी नाराज नहीं होता। 
यदि स्त्री को लगे की उसका प्रेमी उसकी तरफ से रूठ रहा है और उसकी तरफ से लगाव खतम होते जा रहा है तो ऐसे मे वो चीते के फल को शहद के साथ मिलाकर अन्न या किसी पीने वाले माध्यम से अपने प्रेमी को दे दे। उसका सेवन करने के बाद प्रेमी उसकी तरफ आकर्षित होने लगेगा और कभी भी नाराज नहीं होगा।
बिजौरे की जड़ और धतूरे के बीज को अगर प्याज के साथ पीस दिया जाये और फिर जिसको भी सुघाया जाए तो वो व्यक्ति उसके वश मे हो जाता है। यदि व्यक्ति नागकेसर को खरल में कूट छान करके शुद्ध घी की साथ मिलाकर, उसका लेप माथे पर लगाता है तो उसकी नाराजगी हमेशा के लिए दूर हो जाती है।
कई बार प्रेमी- प्रेमिका ले बीच जन्मकुंडली से जुड़ा दोष भी पाया जाता है, अगर उसमे कोई ग्रहदोष निकलता है तो उसकी शांति करवा ले। ऐसा करने की वजह से दोनों के प्रेम संबंध में मधुरता बढ़ती है। प्रेमिका को वश में करने के व्यक्ति लिए शुक्रवार के दिन पास के किसी राधाकृष्ण मंदिर मे जाकर उनकी प्रतिमा पर फूल-माला चढ़ा दे। फिर धूप-बत्ती जलाकर मिश्री या लड्डु का भोग लगा दे। इसके बाद आप भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा के सामने बैठकर आराधना करते हुए मंत्र: “ओम क्लीं कृष्णाय गोपीजन वल्लभाय स्वाहाः” का 108 बार जप करे। ऐसा करके आप अपनी प्रेमिका को वशीभूत कर सकते है।
इन सबके अलावा बहुत सी महिलाए सोमवार का व्रत अपने पति के नाम पर रखती है। लेकिन कुछ कुंवारी कन्याएं भी एक योग्य जीवनसाथी को पाने के लिए इस दिन व्रत रखती हैं। इसी प्रकार एक प्रेमी भी अपनी प्रेमिका को पाने या उसे अपनी ओर आकर्षित करने या फिर मनाने के लिए ऐसा कर सकते हैं। या फिर भगवान श्री कृष्ण के मंदिर में जाकर बांसुरी व पान अर्पित करने का टोटका भी असरदार होता है, जिसकी मदद से प्रेम-प्रेमिका एक दूसरे को आसानी से मना सकते हैं।