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Saturday, 23 September 2017
Wednesday, 20 September 2017
जन्मदिन के मौके पर जानें: करीना कपूर की खास बातें
जन्मदिन के मौके पर जानें: करीना कपूर की खास बातेंहजारों-लाखों दिलों की धडकन करीना कपूर आज अपना 36वें जन्मदिन मना रही हैं। अब चाहे स्लिम-ट्रिम जीरो साइज फीगर के लिए मशहूर करीना कपूर खान ने रिफ्यूजी में ही अपनी मासूमियत और खूबसूरत अदाओं से अपनी एक अलग इमेज बना ली थी। वे हर रोल, हर अंदाज में आकर्षक और बेबाक लगीं। करीना कपूर का जन्म मुंबई में हुआ था उनके पिता का नाम रनधीर कपूर और मां का नाम बबिता है और दोनों अपने जमाने के लोकप्रिय स्टार्स रहे हैं। करीना की एक बडी बहन भी है जिनका नाम करिश्मा कपूर है और वो हिन्दी सिनेमा की जाना-मानी अभिनेत्री हैं। उनका पूरा खानदान हिन्दी फिल्म इंडस्ट्री से कहीं ना कहीं जुडा हुआ है। उनके प्रशसंको के साथ-साथ बॉलीवुड की कई अभिनेत्रियों का ये मानना है कि करीना कपूर खान एक बेहद उम्दा कलाकार हैं। bollywood news in hindi
करीना कपूर खान ने अपने अभिनय की शुरूआत साल 2000 में रिलीज हुई फिल्म रिफ्युजी के साथ की। इस फिल्म में अपने अभिनय के लिए उन्हें फिल्मफेयर बेस्ट फीमेल डेब्यू सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार से नवाजा गया था।
करीना कपूर को प्यार से फैमिली और करीबी दोस्त बेबो कहते हैं। उन्होंने कई शैलियों की फिल्मों में कई तरह के किरदार निभाये हैं। बता दें कि करीना बालीवुड की सबसे ज्यादा फीस लेने वाली अभिनेत्रियों में शुमार है। उनका ऑफस्क्रीन जीवन भी काफी चर्चा में रहता है। अब चाहे शाहिद कपूर के साथ उनका रिलेशन-ब्रेकअप हो या सैफ अली खान शादी।
करीना ने जमनाबाई नर्सी स्कूल मुंबई और वेलहम गल्र्स स्कूल, देहरादून से पढाई की थी। इसके बाद उन्होंने मीठीबाई कॉलेज, विलेपार्ले, मुंबई से कॉमर्स की दो साल की पढाई की।
करीना कपूर ने अपने से 10 साल उम्र में बडे एक्टर सैफ अली खान से शादी की है। शादी से पहले उनके अपने सह-अभिनेताओं से रहे अफेयर्स भी मीडिया की खूब सुर्खियां बटोरते रहे। entertainment news in hindi
खूबसूरत करीना योग और शाकाहारी भोजन को काफी महत्व देती हैं और ये उनकी दिनचर्या का अभिन्न हिस्सा भी है।
करीना बॉलीवुड जगत की पहली इकलौती अभिनेत्री है जिन्होंने पांचों खान के साथ काम किया है। यह तो करीना हो सकती है जिन्होंने फिल्म हीरोइन में एक-दो नहीं बल्कि 138 डिजाइननर साडियां पहनी थी।
करीना कपूर खान उनकी फिल्मों को लेकर इतनी सुर्खियों ने चर्चा नहीं बटोरी जितनी कि 2016 में उनकी मां बनने को लेकर। उनकी प्रेंग्नेसी का आलाम यह था कि लोग उनके बेबी की डिलावीर से लेकर उनके द्वारा पहने गये आउटफिट और फैशन बारे में सब कुछ जानें की लालसा रख रहे हैं। latest entertainment news in hindi
बता दें कि साल 2007 में करीना की सैफ अली खान से फिल्म ओमकारा के सेट पर नजदीकियां बढी थीं। कुछ दिनों तक एक-दूसरे को डेट करने के बाद 16 अक्टूबर 2012 को उन्होंने शादी कर ली। करीना सैफ की दूसरी पत्नी है। करीना कपूर खान और सैफ अली खान एक बेटे के प्राउड पैरेंट बन चकु हैं। 20 दिसंबर को करीना कपूर खान मां बनी और 22 दिसंबर को वह अपने क्यूट बेबी को लेकर घर पहुंच गई। उन्होंने अपने बेटे का नाम तैमूर अली खान रखा है। आपको बता दें कि करीना के बेटे का ये नाम रखने पर लोगों के अलग-अलग रिएक्शन आ रहे हैं। मुंबई में अपने घर पहुंचे करीना और सैफ ने बच्चे की झलक भी कैमरे के सामने दिखाई।
फिल्म सोनम कपूर, स्वरा भारस्कर, करीना कपूर खान और शिखा तल्सानिया के साथ अभिनय करती नजर आने वाली है। ‘वीरे दी वेडिंग’ को एकता कपूर और रिया कपूर इस फिल्म की सह-निर्माता हैं।
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चांसलर-वाइस चांसलर पदनाम वाली निजी विवि की डिग्री पर रोक, कुछ निजी विवि ने नई डिग्री छपवाई, आखिर क्यों, पढ़ें
जयपुर । प्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग ने सख्ती दिखाते हुए चांसलर (कुलाधिपति ) और वाइस चांसलर (कुलपति) पदनाम लिखी निजी यूनिवर्सिटी की डिग्रियों को प्रमाणित करने से मना कर दिया है। वहीं उच्च शिक्षा विभाग की सख्ती के बाद कुछ प्राइवेट यूनिवर्सिटी ने डिग्री पर चेयरपर्सन और प्रेसीडेंट छपवाना शुरू कर दिया है, जिससे छात्र-छात्राओं को अपनी डिग्री को उच्च शिक्षा विभाग से प्रमाणित करवाने में कोई दिक्कत नहीं हो।
आपको बता दें कि प्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजहंस उपाध्याय ने एक आदेश जारी करके निजी यूनिवर्सिटी की चांसलर (कुलाधिपति ) और वाइस चांसलर (कुलपति) के पदनाम पर हस्ताक्षर युक्त डिग्रियों को प्रमाणित करने पर रोक लगा दी थी। इस खबर को खास खबर ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। वहीं अतिरिक्त मुख्य सचिव के इस आदेश के बाद निजी यूनिवर्सिटी के छात्र-छात्राओं को दिक्कत आने लगी। छात्र-छात्राओं की दिक्कतों को देखते हुए कुछ प्राइवेट यूनिवर्सिटी के संचालकों ने डिग्रियों को दोबारा छपवाया और डिग्री पर विश्वविद्यालय एक्ट के प्रावधानों के तहत चेयरपर्सन और प्रेसीडेंट के पदनाम पर ही हस्ताक्षर करवाए। Rajasthan news in hindi
उच्च शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव डॉ. नाथू लाल सुमन के मुताबिक उच्च शिक्षा विभाग निजी यूनिवर्सिटी की उन डिग्रियों को प्रमाणित नहीं कर रहा है, जिन डिग्रियों पर चांसलर और वाइस चांसलर पदनाम लिखा हुआ है।
उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा विभाग इस तरह की डिग्रियों को दोबारा संबंधित निजी विश्वविद्यालयों को भेज रहा है ।
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Tuesday, 19 September 2017
Friday, 15 September 2017
Friday, 1 September 2017
जीवन में खुशियां लाने के लिए करें इस देव को प्रसन्न
जिस तरह सृष्टि को आलोकित करने का काम सूर्य करता है उसी तरह जीवन में खुशियां भरने के लिए सूर्य देव को प्रसन्न करना बेहद जरूरी है। प्राचीन काल से ही भारतीय ऋषि-मुनि सूर्योदय से पूर्व ब्रह्म बेला में या ठीक सूर्योदय के समय नदी में स्नान करते थे और स्नान के उपरांत भगवान सूर्यदेव को जल अर्पित करते थे।
सूर्य नमस्कार का महत्व
सूर्यदेव पूरे ब्रह्मांड की केन्द्रक शक्ति माने जाते हैं। जीवन में प्रकाश, ज्ञान, ऊर्जा, ऊष्मा, जीवन शक्ति के संचार और रोगाणु-किटाणु (भूत-प्रेत-पिशाचादि) के नाश के लिये जगत के समस्त जीव सूर्यदेव पर निर्भर हैं। सूर्य नमस्कार करने से सूर्यदेव प्रसन्न होते हैं और हमारे जीवन में अज्ञानता के अंधकार को दूर कर शक्ति का संचार करते हैं। सूर्य नमस्कार वैसे तो एक सर्वांग व्यायाम है लेकिन यह व्यायाम के साथ सूर्योपासना का तरीका भी है विधिवत पूजा करने से जो पुण्य प्राप्त होता है उसके समान पुण्य ही सूर्यदेव को प्रात:काल सूर्य नमस्कार करने मिलता है।
कितनी बार करें सूर्य नमस्कार
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार सूर्य नमस्कार 13 बार करना चाहिये। हर बार सूर्य नमस्कार के साथ-साथ ॐ मित्राय नमः, ॐ रवये नमः, ॐ सूर्याय नमः, ॐ भानवे नमः, ॐ खगाय नमः, ॐ पूष्णे नमः, ॐ हिरण्यगर्भाय नमः, ॐ मरीचये नमः, ॐ आदित्याय नमः, ॐ सवित्रे नमः, ॐ अर्काय नमः, ॐ भास्कराय नमः, ॐ सवितृ सूर्यनारायणाय नमः इन तेरह मंत्रो का उच्चारण भी अवश्य करना चाहिये।
यह भी रखें ध्यान
सूर्य को जल सदैव प्रात:काल में चढ़ाएं। 6 से 7 बजे प्रात: का समय उपयुक्तय है। अधिक विलम्ब से न चढ़ाएं। अधिकाधिक आठ बजे तक जल अवश्य चढ़ा लें। सूर्य को जल चढ़ाते समय सीधा उसे न देखें। सूर्य को जल चढ़ाते समय जल की जो धारा आप बनाते हैं उसमें सूर्य रश्मियों या सूर्य के दर्शन करें। जल चढ़ाने के उपरान्त सूर्य देवता से अपने समस्त् गलतियों की क्षमा याचना करते हुए उनसे प्रार्थना करें-‘हे सूर्य देव! मुझसे जो भी भूलचूक हो गई हैं या मैंने जो गलतियां की हैं, कृपया उन्हें क्षमा कर दें। मुझे स्वास्थ्य प्रदान करें। मेरे नेत्रों के समस्त कष्ट दूर करते हुए उसमें ज्योति बढ़ाएं। स्वयं सदृश मेरा यश बढ़ाएं। मुझ पर अपनी कृपा सदैव बनाएं रखें। मुझे आशीर्वाद दें जिससे मैं अपना मनुष्यं जीवन सार्थक कर पाऊं।
सूर्य नमस्कार का महत्व
सूर्यदेव पूरे ब्रह्मांड की केन्द्रक शक्ति माने जाते हैं। जीवन में प्रकाश, ज्ञान, ऊर्जा, ऊष्मा, जीवन शक्ति के संचार और रोगाणु-किटाणु (भूत-प्रेत-पिशाचादि) के नाश के लिये जगत के समस्त जीव सूर्यदेव पर निर्भर हैं। सूर्य नमस्कार करने से सूर्यदेव प्रसन्न होते हैं और हमारे जीवन में अज्ञानता के अंधकार को दूर कर शक्ति का संचार करते हैं। सूर्य नमस्कार वैसे तो एक सर्वांग व्यायाम है लेकिन यह व्यायाम के साथ सूर्योपासना का तरीका भी है विधिवत पूजा करने से जो पुण्य प्राप्त होता है उसके समान पुण्य ही सूर्यदेव को प्रात:काल सूर्य नमस्कार करने मिलता है।
कितनी बार करें सूर्य नमस्कार
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार सूर्य नमस्कार 13 बार करना चाहिये। हर बार सूर्य नमस्कार के साथ-साथ ॐ मित्राय नमः, ॐ रवये नमः, ॐ सूर्याय नमः, ॐ भानवे नमः, ॐ खगाय नमः, ॐ पूष्णे नमः, ॐ हिरण्यगर्भाय नमः, ॐ मरीचये नमः, ॐ आदित्याय नमः, ॐ सवित्रे नमः, ॐ अर्काय नमः, ॐ भास्कराय नमः, ॐ सवितृ सूर्यनारायणाय नमः इन तेरह मंत्रो का उच्चारण भी अवश्य करना चाहिये।
यह भी रखें ध्यान
सूर्य को जल सदैव प्रात:काल में चढ़ाएं। 6 से 7 बजे प्रात: का समय उपयुक्तय है। अधिक विलम्ब से न चढ़ाएं। अधिकाधिक आठ बजे तक जल अवश्य चढ़ा लें। सूर्य को जल चढ़ाते समय सीधा उसे न देखें। सूर्य को जल चढ़ाते समय जल की जो धारा आप बनाते हैं उसमें सूर्य रश्मियों या सूर्य के दर्शन करें। जल चढ़ाने के उपरान्त सूर्य देवता से अपने समस्त् गलतियों की क्षमा याचना करते हुए उनसे प्रार्थना करें-‘हे सूर्य देव! मुझसे जो भी भूलचूक हो गई हैं या मैंने जो गलतियां की हैं, कृपया उन्हें क्षमा कर दें। मुझे स्वास्थ्य प्रदान करें। मेरे नेत्रों के समस्त कष्ट दूर करते हुए उसमें ज्योति बढ़ाएं। स्वयं सदृश मेरा यश बढ़ाएं। मुझ पर अपनी कृपा सदैव बनाएं रखें। मुझे आशीर्वाद दें जिससे मैं अपना मनुष्यं जीवन सार्थक कर पाऊं।
विवाह में आ रही है परेशानी तो अपनाएं ये उपाय
हर माता-पिता अपनी संतानों की शादी के लिए बहुत चिंतित और परेशान रहते है और वे चाहते है कि उनकी संतान को सुयोग्य वर या वधु समय पर मिल जाएं। शादी लडकियों के माता पिता के लिए एक बडी वजह है क्योकि ये माना जाता है कि लडकी की शादी समय पर ना हो तो उसके लिए रिश्ते मिलना मुश्किल हो जाता है और लडकी का रिश्ता तय होने में कभी कभी रिश्ते टूटते भी है।
जन्मकुंडली में कई ऐसे योग होते हैं जिनकी वजह से कोई भी पुरुष या स्त्री की विवाह में काफी रूकावट आती है। कई बार ये रूकावट बाहरी बाधाओं की वजह से भी आती हैं। इस प्रकार की स्थिति होने पर शीघ्र विवाह के उपाय करने में समझदारी रहती है। इन उपाय को करने से शीघ्र विवाह के मार्ग बनते है, तथा विवाह मार्ग की समस्त बाधाएं दूर होती है।
- रविवार के दिन एक पीला कपडा लें और उसमे 7 सुपारी, 7 हल्दी की गांठ, 7 गुड की ढेली, 7 पील फुल, 70 ग्राम चने की दाल, 70 सेंटीमीटर पीला कपडा और 1 पंद्रह का यंत्र रख लें। अब आप इन सबसे माता पार्वती की पूजा करें और पूजन के बाद इन सबको 40 दिनों तक अपने घर में रखें। माता पार्वती के आशीर्वाद से इन 40 दिनों के भीतर ही आपके विवाह के योग बनने आरंभ हो जायेंगे।
- गुरुवार के दिन व्रत रखें और पीली वस्तुओं जैसे पीले कपडे, चने के दाल, हल्दी, या गुड इत्यादि का दान करें तो उन्हें शीघ्र ही लाभ मिलता है। साथ ही व्रत के दौरान उन्हें ब्रहस्पति व्रत कथा भी पढनी चाहियें और केले के पेड पर जल चढाना चाहिये। ध्यान रहें कि आप दिन में कभी भी न सोयें और श्याम के समय पीला ही भोजन करने। इस तरह आप इस उपाय को 21 गुरुवार तक अपनायें।
माह में पूर्णिमा के दिन आप वाट के पेड की 108 परिक्रमा लगायें और उन्हें मन ही मन विनती करें कि हे प्रभु मेरे विवाह में आई सभी बाधाओं को दूर करें और मुझे मनचाहे वर या वधु का वरदान दें। साथ ही आप उनसे ये भी प्रार्थना करें कि आप दोनों का जीवन सदा खुशियाँ से भरा रहें।
- जब आपके विवाह की बाते चल रही हो तो उस वक्त आप अपने बालों को खुलें रखें। साथ ही अगर आप अपनी किसी सहेली के विवाह में जा रही है तो आप उनके हाथ में लगी मेहंदी से कुछ मेहंदी हाथ में लगायें। इससे भी जल्द आपकी शादी के योग बनते है।
- आप अपने पलंग के नीचे से लोहे के सामान को निकाल दें और बाकि सारी चीजों को सही और साफ सुथरी तरह रखें। हो सके तो आप सामान्य पलंग का इस्तेमाल करें।
- शीघ्र विवाह के लिए सोमवार को 1100 ग्राम चने की दाल व सवा लीटर कच्चे दूध का दान करें। यह प्रयोग तब तक करते रहना है जब तक कि विवाह न हो जाय।
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जन्मकुंडली में कई ऐसे योग होते हैं जिनकी वजह से कोई भी पुरुष या स्त्री की विवाह में काफी रूकावट आती है। कई बार ये रूकावट बाहरी बाधाओं की वजह से भी आती हैं। इस प्रकार की स्थिति होने पर शीघ्र विवाह के उपाय करने में समझदारी रहती है। इन उपाय को करने से शीघ्र विवाह के मार्ग बनते है, तथा विवाह मार्ग की समस्त बाधाएं दूर होती है।
- रविवार के दिन एक पीला कपडा लें और उसमे 7 सुपारी, 7 हल्दी की गांठ, 7 गुड की ढेली, 7 पील फुल, 70 ग्राम चने की दाल, 70 सेंटीमीटर पीला कपडा और 1 पंद्रह का यंत्र रख लें। अब आप इन सबसे माता पार्वती की पूजा करें और पूजन के बाद इन सबको 40 दिनों तक अपने घर में रखें। माता पार्वती के आशीर्वाद से इन 40 दिनों के भीतर ही आपके विवाह के योग बनने आरंभ हो जायेंगे।
- गुरुवार के दिन व्रत रखें और पीली वस्तुओं जैसे पीले कपडे, चने के दाल, हल्दी, या गुड इत्यादि का दान करें तो उन्हें शीघ्र ही लाभ मिलता है। साथ ही व्रत के दौरान उन्हें ब्रहस्पति व्रत कथा भी पढनी चाहियें और केले के पेड पर जल चढाना चाहिये। ध्यान रहें कि आप दिन में कभी भी न सोयें और श्याम के समय पीला ही भोजन करने। इस तरह आप इस उपाय को 21 गुरुवार तक अपनायें।
माह में पूर्णिमा के दिन आप वाट के पेड की 108 परिक्रमा लगायें और उन्हें मन ही मन विनती करें कि हे प्रभु मेरे विवाह में आई सभी बाधाओं को दूर करें और मुझे मनचाहे वर या वधु का वरदान दें। साथ ही आप उनसे ये भी प्रार्थना करें कि आप दोनों का जीवन सदा खुशियाँ से भरा रहें।
- जब आपके विवाह की बाते चल रही हो तो उस वक्त आप अपने बालों को खुलें रखें। साथ ही अगर आप अपनी किसी सहेली के विवाह में जा रही है तो आप उनके हाथ में लगी मेहंदी से कुछ मेहंदी हाथ में लगायें। इससे भी जल्द आपकी शादी के योग बनते है।
- आप अपने पलंग के नीचे से लोहे के सामान को निकाल दें और बाकि सारी चीजों को सही और साफ सुथरी तरह रखें। हो सके तो आप सामान्य पलंग का इस्तेमाल करें।
- शीघ्र विवाह के लिए सोमवार को 1100 ग्राम चने की दाल व सवा लीटर कच्चे दूध का दान करें। यह प्रयोग तब तक करते रहना है जब तक कि विवाह न हो जाय।
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